प्रिय मित्रों,
सादर नमस्कार व सुप्रभात।
आज एक ऐसे देशभक्त व कर्त्तव्य परायण नेता को याद करने का दिन है जिन्हें अपनी सादगी और ईमानदारी के लिए सदैव याद रखा जाता है और सदा याद रखा जाएगा। जी हां, मैं बात कर रहा हूं, गुदड़ी के लाल, श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की। आज उनकी पुण्य तिथि है। उनका देहांत आज ही के दिन ताशकंद (उज्बेकिस्तान) में संदिग्ध अवस्था में हुआ था। वो एक मात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे जिनकी मृत्यु देश के बाहर हुई थी।
स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने
अपने जीवनकाल रेलमंत्री एवं गृह मंत्री पद पर रह चुके हैं। इन्होने ही देश को भारत पाकिस्तान 1965 युद्ध के दौरान “जय जवान जय किसान” का नारा दिया था।
ये युद्ध 10 जनवरी 1966 को ताशकंद समझौते में औपचारिक रूप से खत्म हुआ, और अगले ही दिन यानि 11 जनवरी 1966 को इनकी मृत्यु हो गई. इनकी मृत्यु कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने से हुई परंतु लोग उनकी मौत को साज़िश का आरोप भी लगाते हैं।
निजी तौर पर लाल बहादुर शास्त्री मेरे सबसे प्रिय राजनेता रहें हैं, इनका जीवन आज भी हम सभी को प्रेरणा देता है।
ऋणी राष्ट्र की ओर से इस गुदड़ी के लाल श्री लाल बहादुर शास्त्री को शत शत नमन। जय हिंद।
ऋषि राज
Exploring India with Risshi